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शान्ति पर्व
अध्याय २७४
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भीष्म उवाच
एतन्माहेश्वरं तेजो ज्वरो नाम सुदारुणः |  ५५   क
नमस्यश्चैव मान्यश्च सर्वप्राणिभिरीश्वरः ||  ५५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति