वन पर्व  अध्याय २७४

मार्कण्डेय़ उवाच

जहीमान्राक्षसान्पापानात्मनः प्रतिरूपकान् |  ११   क
जघान रामस्तांश्चान्यानात्मनः प्रतिरूपकान् ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति