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वन पर्व
अध्याय २७४
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मातलिरु उवाच
तदनेन नरव्याघ्र मय़ा यत्तेन संय़ुगे |  १४   क
स्यन्दनेन जहि क्षिप्रं रावणं मा चिरं कृथाः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति