वन पर्व  अध्याय २७४

मातलिरु उवाच

स रामाय़ महाघोरं विससर्ज निशाचरः |  १९   क
शूलमिन्द्राशनिप्रख्यं व्रह्मदण्डमिवोद्यतम् ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति