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वन पर्व
अध्याय २७४
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मार्कण्डेय़ उवाच
कृत्वा रामस्य रूपाणि लक्ष्मणस्य च भारत |  ८   क
अभिदुद्राव रामं च लक्ष्मणं च दशाननः ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति