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शान्ति पर्व
अध्याय २७५
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समङ्ग उवाच
यदा न शोचेमहि किं नु न स्या; द्धर्मेण वा नारद कर्मणा वा |  १०   क
कृतान्तवश्यानि यदा सुखानि; दुःखानि वा यन्न विधर्षय़न्ति ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति