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शान्ति पर्व
अध्याय २७५
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समङ्ग उवाच
अर्थकामौ परित्यज्य विशोको विगतज्वरः |  १९   क
तृष्णामोहौ तु सन्त्यज्य चरामि पृथिवीमिमाम् ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति