शान्ति पर्व  अध्याय २७५

समङ्ग उवाच

न मृत्युतो न चाधर्मान्न लोभान्न कुतश्चन |  २०   क
पीतामृतस्येवात्यन्तमिह चामुत्र वा भय़म् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति