वन पर्व  अध्याय २७५

मार्कण्डेय़ उवाच

राजा दशरथश्चैव दिव्यभास्वरमूर्तिमान् |  १९   क
विमानेन महार्हेण हंसय़ुक्तेन भास्वता ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति