वन पर्व  अध्याय २९६

वैशम्पाय़न उवाच

स दृष्ट्वा विमलं तोय़ं सारसैः परिवारितम् |  ११   क
पातुकामस्ततो वाचमन्तरिक्षात्स शुश्रुवे ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति