वन पर्व  अध्याय २७५

वरुण उवाच

रसा वै मत्प्रसूता हि भूतदेहेषु राघव |  २८   क
अहं वै त्वां प्रव्रवीमि मैथिली प्रतिगृह्यताम् ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति