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वन पर्व
अध्याय २७५
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मार्कण्डेय़ उवाच
पुष्पकेण विमानेन खेचरेण विराजता |  ५२   क
कामगेन यथा मुख्यैरमात्यैः संवृतो वशी ||  ५२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति