शान्ति पर्व  अध्याय २७६

नारद उवाच

प्रीय़माणा नरा यत्र प्रय़च्छेय़ुरय़ाचिताः |  ५२   क
स्वस्थचित्तो वसेत्तत्र कृतकृत्य इवात्मवान् ||  ५२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति