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शान्ति पर्व
अध्याय २७७
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भीष्म उवाच
स्वजनं हि यदा मृत्युर्हन्त्येव तव पश्यतः |  २०   क
कृतेऽपि यत्ने महति तत्र वोद्धव्यमात्मना ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति