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शान्ति पर्व
अध्याय २७७
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भीष्म उवाच
अपत्यानां च वैगुण्यं जनं विगुणमेव च |  ४४   क
पश्यन्भूय़िष्ठशो लोके को मोक्षं नाभिपूजय़ेत् ||  ४४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति