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शान्ति पर्व
अध्याय २७७
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भीष्म उवाच
सुखं मोक्षसुखं लोके न च लोकोऽवगच्छति |  ५   क
प्रसक्तः पुत्रपशुषु धनधान्यसमाकुलः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति