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वन पर्व
अध्याय २७७
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राजो उवाच
प्रार्थितः पुरुषो यश्च स निवेद्यस्त्वय़ा मम |  ३३   क
विमृश्याहं प्रदास्यामि वरय़ त्वं यथेप्सितम् ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति