वन पर्व  अध्याय २७७

राजो उवाच

अप्रदाता पिता वाच्यो वाच्यश्चानुपय़न्पतिः |  ३५   क
मृते भर्तरि पुत्रश्च वाच्यो मातुररक्षिता ||  ३५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति