शान्ति पर्व  अध्याय १८१

भृगुरु उवाच

आदिदेवसमुद्भूता व्रह्ममूलाक्षय़ाव्यया |  २०   क
सा सृष्टिर्मानसी नाम धर्मतन्त्रपराय़णा ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति