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शान्ति पर्व
अध्याय २७९
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भीष्म उवाच
नाय़ं परस्य सुकृतं दुष्कृतं वापि सेवते |  २१   क
करोति यादृशं कर्म तादृशं प्रतिपद्यते ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति