अनुशासन पर्व  अध्याय ५७

वैशम्पाय़न उवाच

उदवासं वसेद्यस्तु स नराधिपतिर्भवेत् |  १८   क
सत्यवादी नरश्रेष्ठ दैवतैः सह मोदते ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति