वन पर्व  अध्याय २७९

मार्कण्डेय़ उवाच

परिचारैर्गुणैश्चैव प्रश्रय़ेण दमेन च |  १९   क
सर्वकामक्रिय़ाभिश्च सर्वेषां तुष्टिमावहत् ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति