शान्ति पर्व  अध्याय २००

भीष्म उवाच

एते पापकृतस्तात चरन्ति पृथिवीमिमाम् |  ४१   क
श्वकाकवलगृध्राणां सधर्माणो नराधिप ||  ४१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति