आदि पर्व  अध्याय २८

सूत उवाच

विनर्दन्निव चाकाशे वैनतेय़ः प्रतापवान् |  १४   क
पक्षाभ्यामुरसा चैव समन्ताद्व्याक्षिपत्सुरान् ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति