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वन पर्व
अध्याय २९६
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यक्ष उवाच
किं विघातेन ते पार्थ प्रश्नानुक्त्वा ततः पिव |  ३०   क
अनुक्त्वा तु ततः प्रश्नान्पीत्वैव न भविष्यसि ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति