आदि पर्व  अध्याय २८

सूत उवाच

महावीर्या महोत्साहास्तेन ते वहुधा क्षताः |  २१   क
रेजुरभ्रघनप्रख्या रुधिरौघप्रवर्षिणः ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति