आदि पर्व  अध्याय २८

सूत उवाच

एवं संलोडय़ामास गरुडस्त्रिदिवालय़म् |  ७   क
पक्षतुण्डप्रहारैश्च देवान्स विददार ह ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति