शान्ति पर्व  अध्याय २८

अश्मो उवाच

रसाय़नविदश्चैव सुप्रय़ुक्तरसाय़नाः |  ४६   क
दृश्यन्ते जरय़ा भग्ना नगा नागैरिवोत्तमैः ||  ४६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति