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अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
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राजो उवाच
योगेन च समाविष्टो भरद्वाजेन धीमता |  ३०   क
तेजो लौक्यं स सङ्गृह्य तस्मिन्देशे समाविशत् ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति