शान्ति पर्व  अध्याय ३९

वासुदेव उवाच

स एष निहतः शेते व्रह्मदण्डेन राक्षसः |  ४७   क
चार्वाको नृपतिश्रेष्ठ मा शुचो भरतर्षभ ||  ४७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति