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द्रोण पर्व
अध्याय १६०
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सञ्जय़ उवाच
एष ते पाण्डवः शत्रुरविषह्योऽग्रतः स्थितः |  ३५   क
क्षत्रधर्ममवेक्षस्व श्लाघ्यस्तव वधो जय़ात् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति