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भीष्म पर्व
अध्याय ५२
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सञ्जय़ उवाच
तथैव धर्मराजोऽपि गजानीकेन संवृतः |  १५   क
ततस्तु सात्यकी राजन्द्रौपद्याः पञ्च चात्मजाः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति