menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २८
chevron_left
chevron_right
व्राह्मण उवाच
नित्यस्य चैतस्य भवन्ति नित्या; निरीक्षमाणस्य वहून्स्वभावान् |  ५   क
न सज्जते कर्मसु भोगजालं; दिवीव सूर्यस्य मय़ूखजालम् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति