सभा पर्व  अध्याय ७२

धृतराष्ट्र उवाच

पर्यानय़ेत्सभामध्यमृते दुर्द्यूतदेविनम् |  १४   क
स्त्रीधर्मिणीं वरारोहां शोणितेन समुक्षिताम् ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति