सभा पर्व  अध्याय २८

वैशम्पाय़न उवाच

पाण्ड्यांश्च द्रविडांश्चैव सहितांश्चोड्रकेरलैः |  ४८   क
अन्ध्रांस्तलवनांश्चैव कलिङ्गानोष्ट्रकर्णिकान् ||  ४८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति