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वन पर्व
अध्याय २८
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वैशम्पाय़न उवाच
यस्य शस्त्रप्रतापेन प्रणताः सर्वपार्थिवाः |  २४   क
यज्ञे तव महाराज व्राह्मणानुपतस्थिरे ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति