विराट पर्व  अध्याय २८

वैशम्पाय़न उवाच

साम्ना भेदेन दानेन दण्डेन वलिकर्मणा |  ११   क
न्याय़ेनानम्य च परान्वलाच्चानम्य दुर्वलान् ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति