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भीष्म पर्व
अध्याय २८
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श्रीभगवानु उवाच
अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः |  १   क
स संन्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रिय़ः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति