भीष्म पर्व  अध्याय २८

श्रीभगवानु उवाच

योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः |  १०   क
एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति