भीष्म पर्व  अध्याय २८

श्रीभगवानु उवाच

असंय़तात्मना योगो दुष्प्राप इति मे मतिः |  ३६   क
वश्यात्मना तु यतता शक्योऽवाप्तुमुपाय़तः ||  ३६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति