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विराट पर्व
अध्याय ५९
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वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवेन हताः शूरा भीष्मस्य रथरक्षिणः |  ३०   क
शेरते स्म तदा राजन्कौन्तेय़स्याभितो रथम् ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति