भीष्म पर्व  अध्याय २८

श्रीभगवानु उवाच

उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादय़ेत् |  ५   क
आत्मैव ह्यात्मनो वन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति