शान्ति पर्व  अध्याय १२२

भीष्म उवाच

स राजा धर्मनित्यः सन्सह पत्न्या महातपाः |  २   क
मुञ्जपृष्ठं जगामाथ देवर्षिगणपूजितम् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति