कर्ण पर्व  अध्याय २८

काक उवाच

एवं विद्वान्मावमंस्थाः सूतपुत्राच्युतार्जुनौ |  ६६   क
नृसिंहौ तौ नरश्वा त्वं जोषमास्स्व विकत्थन ||  ६६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति