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वन पर्व
अध्याय ५८
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वृहदश्व उवाच
स तथा नगराभ्याशे सत्कारार्हो न सत्कृतः |  १०   क
त्रिरात्रमुषितो राजा जलमात्रेण वर्तय़न् ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति