आदि पर्व  अध्याय २०६

वैशम्पाय़न उवाच

वेदवेदाङ्गविद्वांसस्तथैवाध्यात्मचिन्तकाः |  २   क
चौक्षाश्च भगवद्भक्ताः सूताः पौराणिकाश्च ये ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति