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शल्य पर्व
अध्याय ३८
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वैशम्पाय़न उवाच
तत औशनसं तीर्थमाजगाम हलाय़ुधः |  ४   क
कपालमोचनं नाम यत्र मुक्तो महामुनिः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति