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शान्ति पर्व
अध्याय २८१
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पराशर उवाच
येऽर्था धर्मेण ते सत्या येऽधर्मेण धिगस्तु तान् |  १९   क
धर्मं वै शाश्वतं लोके न जह्याद्धनकाङ्क्षय़ा ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति