शान्ति पर्व  अध्याय २८१

पराशर उवाच

आहिताग्निर्हि धर्मात्मा यः स पुण्यकृदुत्तमः |  २०   क
वेदा हि सर्वे राजेन्द्र स्थितास्त्रिष्वग्निषु प्रभो ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति