menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय २८१
chevron_left
chevron_right
पराशर उवाच
स चाप्यग्न्याहितो विप्रः क्रिय़ा यस्य न हीय़ते |  २१   क
श्रेय़ो ह्यनाहिताग्नित्वमग्निहोत्रं न निष्क्रिय़म् ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति